इंडी, जिन्हें देसी कुत्ते, इंडियन पैरिया डॉग या INDog भी कहते हैं, भारत की गलियों और गांवों के कुत्ते हैं। ये ब्रीडरों की बनाई कोई ब्रीड नहीं, बल्कि एक लैंडरेस हैं, यानी ऐसी देसी किस्म जो बहुत लंबे समय तक यहां इंसानों के साथ रहते-रहते बनी है। अमेरिका के शौकीनों का एक ग्रुप, Primitive and Aboriginal Dog Society, INDog को मान्यता देता है, और केनेल क्लब ऑफ इंडिया ने 2015 में अपने Kennel Gazette में INDog का ब्रीड स्टैंडर्ड छापा था। भारतीय घरों में रहने वाले कई इंडी गली से या किसी शेल्टर से गोद लिए गए हैं।

क्या इंडी कुत्ते पेडिग्री (शुद्ध नस्ल वाले) कुत्तों से ज्यादा सेहतमंद होते हैं?

लोग अक्सर ऐसा कहते हैं, और यह सच हो भी सकता है, लेकिन किसी स्टडी ने इंडी और पेडिग्री कुत्तों की सेहत की तुलना नहीं की है। भारत की वेटरनरी स्टडीज के मरीजों में इंडी भी होते हैं, पर इस तरह नहीं कि इस सवाल का जवाब मिल सके। सबसे करीबी सबूत दूसरे देशों में मिक्स्ड-ब्रीड कुत्तों पर हुई स्टडीज से मिलता है, और मिक्स्ड-ब्रीड कुत्ते और इंडी एक ही चीज नहीं हैं:

  • यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया की एक स्टडी में वंशानुगत (जेनेटिक) बीमारियों वाले 27,254 कुत्तों को देखा गया, और 24 में से 13 बीमारियों में, हिप डिस्प्लेसिया समेत, मिक्स्ड-ब्रीड और शुद्ध नस्ल (प्योरब्रीड) कुत्तों में कोई फर्क नहीं मिला। प्योरब्रीड कुत्तों में 10 बीमारियां होने की संभावना ज्यादा थी, जिनमें एल्बो डिस्प्लेसिया, मोतियाबिंद और दिल की मांसपेशी की एक बीमारी (DCM) शामिल हैं। मिक्स्ड-ब्रीड कुत्तों में घुटने का लिगामेंट फटने की संभावना ज्यादा थी (Bellumori et al., 2013)।
  • ब्रिटेन में पांच लाख से ज्यादा कुत्तों की एक स्टडी में कुल मिलाकर मीडियन उम्र (यानी आधे कुत्ते इससे कम और आधे इससे ज्यादा जिए) 12.5 साल रही, मिक्स्ड-ब्रीड की 12.0 साल और प्योरब्रीड की 12.7 साल (McMillan et al., 2024)।

तो सीधी बात यह है: यह साबित नहीं हुआ है कि इंडी ज्यादा सेहतमंद होते हैं, लेकिन यहां उन्हें पालने के व्यावहारिक फायदे हैं। वे मीडियम साइज के होते हैं, उनके छोटे बाल भारतीय मौसम के हिसाब से ठीक रहते हैं, उन्हें प्रोफेशनल ग्रूमिंग की जरूरत नहीं होती, और उनमें वे दिक्कतें नहीं होतीं जो चपटे चेहरे या ढलान वाली पीठ के लिए ब्रीड की गई कुछ नस्लों में होती हैं। फिर भी उन्हें किसी भी कुत्ते की तरह टिक फीवर, पार्वो और रेबीज हो सकता है, और उन्हें भी वही वैक्सीन और टिक से बचाव चाहिए।

इंडी को क्या खिलाएं

सबसे आसान सेहतमंद डाइट है: बेस में एक कंप्लीट ड्राई फूड, और उसमें थोड़ा सादा घर का खाना। इंडी आम तौर पर मीडियम साइज के होते हैं, इसलिए ज्यादातर के लिए मीडियम या “all breeds” वाला एडल्ट फूड ठीक रहता है; दाम के लिए देखें डॉग फूड की तुलना।

घर के खाने में से ये चीजें दे सकते हैं: बिना हड्डी का सादा उबला चिकन या मछली, उबला अंडा, थोड़ी मात्रा में पका चावल या रागी, पका हुआ कद्दू, गाजर और बीन्स।

कभी नहीं:

  • प्याज और लहसुन किसी भी रूप में, चाहे कच्चा हो, पका हुआ या पाउडर। ये ज्यादातर भारतीय खाने में होते हैं और कुत्ते के रेड ब्लड सेल्स को नुकसान पहुंचाते हैं (Merck Veterinary Manual)। अपनी दाल या सब्जी कुत्ते को न देने की असली वजह यही है।
  • अंगूर और किशमिश, चॉकलेट, जाइलिटॉल (xylitol, शुगर-फ्री चीजों में डलने वाला एक स्वीटनर) और मैकाडेमिया नट्स (ASPCA)।
  • पकी हुई हड्डियां, जो टूटकर नुकीले टुकड़े बन सकती हैं।
  • नमकीन, तला हुआ या होटल का बचा हुआ खाना।

दूध और दही: एडल्ट कुत्तों के शरीर में दूध की शुगर पचाने वाला एंजाइम कम बनता है, इसलिए दूध से बनी चीजों से पॉटी पतली हो सकती है (ASPCA)। दही दें तो एक चम्मच से शुरू करें।

कसरत

इंडी एक्टिव और हर चीज में दिलचस्पी लेने वाले कुत्ते होते हैं। ज्यादातर को दिन में कम से कम दो अच्छी वॉक चाहिए, बेंगलुरु में सुबह और शाम की ठंडक में, साथ में खेल या सूंघने वाला कोई गेम। बोर हुआ इंडी अक्सर शोर मचाने या चीजें तोड़ने-फोड़ने लगता है। कुत्ते का पट्टा सिर्फ चारों तरफ से घिरी (फेंस वाली) जगह में खोलें; देखें बेंगलुरु के ऑफ-लीश डॉग पार्क (अंग्रेजी में)।

सेहत: हर इंडी के लिए जरूरी

  • वैक्सीनेशन: कोर वैक्सीन, रेबीज और लेप्टोस्पायरोसिस, वैक्सीनेशन शेड्यूल के हिसाब से।
  • साल भर टिक से बचाव: बेंगलुरु में टिक फीवर आम है; देखें टिक फीवर।
  • डीवर्मिंग, वेट (जानवरों के डॉक्टर) के बताए शेड्यूल पर।
  • नसबंदी, अगर पहले से नहीं हुई है।
  • दांत: चबाने वाले खिलौने, और अगर कुत्ता करने दे तो ब्रश करना।

गली के एडल्ट कुत्ते को गोद लेना

कई इंडी बड़े होने के बाद गोद लिए जाते हैं, अक्सर मोहल्ले के ऐसे कुत्ते जिन्हें गली में कोई पहले से खाना खिलाता है।

  • पहले खाना खिलाने वालों (फीडर्स) से बात करें। उन्हें कुत्ते का स्वभाव और उसकी सेहत की हिस्ट्री पता होती है, और यह भी कि कोई और उसका ध्यान रखता है या नहीं।
  • कान देखें। एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स, 2023 के तहत दाएं कान पर “V” आकार का कट इस बात का निशान है कि मोहल्ले के इस कुत्ते की नसबंदी और वैक्सीनेशन हो चुका है (ABC Rules 2023)। जिन कुत्तों की नसबंदी 2023 से पहले हुई, उन पर कोई और निशान हो सकता है, इसलिए फीडर्स से पूछें। वैक्सीनेशन पुराना हो सकता है, इसलिए बूस्टर के बारे में वेट से पूछें।
  • वेट के पास पहली विजिट: चेक-अप, डीवर्मिंग, टिक चेक और टिक से बचाव, और वैक्सीनेशन। जिस एडल्ट कुत्ते की हिस्ट्री पता न हो, उसके लिए WSAVA की वैक्सीनेशन गाइडलाइंस कहती हैं कि बहुत संभव है कि कोर वैक्सीन की एक ही डोज काफी हो, साथ में रेबीज (WSAVA 2024)।
  • शुरुआती हफ्ते: कुत्ते को एक शांत कोना और तय दिनचर्या दें, वॉक पर ID टैग के साथ ठीक से फिट हार्नेस पहनाएं, और मानकर चलें कि घरवालों पर भरोसा करने में उसे समय लगेगा। शुरुआती दिनों में गली का कुत्ता खुले दरवाजे से निकल सकता है या कॉलर से सिर निकालकर भाग सकता है।

बेंगलुरु में इंडी को नया घर दिलाने वाले शेल्टरों में CUPA और CARE (Charlie’s Animal Rescue Centre) शामिल हैं। शेल्टर से आए एडल्ट कुत्ते का स्वभाव वहां का स्टाफ पहले से जानता है, और यह तब काम आता है जब घर में बच्चे या दूसरे पालतू हों।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

इंडी कितने साल जीते हैं? किसी स्टडी ने यह नहीं मापा है। तुलना के लिए, ब्रिटेन की एक बड़ी स्टडी में कुत्तों की मीडियन उम्र 12.5 साल थी, और मीडियम साइज के कुत्ते आम तौर पर बड़ी और बहुत बड़ी (जायंट) ब्रीड से ज्यादा जीते हैं। अच्छा खाना, वैक्सीन, टिक से बचाव और कुत्ते को ट्रैफिक से बचाकर रखना, इन सबसे मदद मिलती है।

क्या इंडी बच्चों के साथ अच्छे रहते हैं? किसी भी ब्रीड की तरह, यह कुत्ते पर निर्भर करता है। शेल्टर के एडल्ट कुत्तों का स्वभाव पता होता है; स्टाफ से पूछें। छोटे बच्चे किसी भी कुत्ते के साथ हों तो नजर रखें, और बच्चों को सिखाएं कि वे कुत्ते को खुद अपने पास आने दें।

क्या इंडी फ्लैट में रह सकता है? हां। इंडी मीडियम साइज के होते हैं और आसानी से ढल जाते हैं, बस उन्हें हर दिन अच्छी वॉक पर ले जाया जाए।

क्या इंडी को ग्रूमिंग चाहिए? बहुत कम: हफ्ते में एक बार ब्रश, गंदे हों तो नहलाना, और समय-समय पर नाखून काटना।

क्या इंडी को ट्रेन करना आसान है? वे जल्दी सीखते हैं और अपने दिमाग से सोचते हैं। हर कुत्ते की तरह, इनाम वाली ट्रेनिंग, यानी ट्रीट और तारीफ के साथ, सबसे कारगर रहती है; सख्ती से टोकने पर अपनी मर्जी से चलने वाला कुत्ता अक्सर आपसे कतराने लगता है।

क्या इंडी को पालना सस्ता पड़ता है? आम तौर पर खाने और ग्रूमिंग का खर्च कम आता है। देखें बेंगलुरु में कुत्ता पालने का खर्च (अंग्रेजी में)।

लेखक: कौशिक, बर्फी के पापा और FurFam के फाउंडर। यह हमारी अंग्रेजी गाइड का हिंदी अनुवाद है। गाइड के तथ्य 20 अक्टूबर 2026 को उसमें लिंक किए गए स्रोतों से जांचे गए थे। इसे किसी वेट ने रिव्यू नहीं किया है।
ध्यान दें: यह गाइड इसमें लिंक किए गए प्रकाशित स्रोतों पर आधारित है। यह मेडिकल सलाह नहीं है। सेहत से जुड़ी किसी भी परेशानी के लिए किसी योग्य वेट से पूछें।

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