वर्ल्ड स्मॉल एनिमल वेटरनरी एसोसिएशन (WSAVA) ने एशिया पर अपनी 2015 की रिपोर्ट में लिखा कि भारत में कुत्तों के वैक्सीनेशन पर कोई राष्ट्रीय नीति नहीं थी, और जिन देशों में उनकी टीम गई, भारत समेत, वहां ज्यादातर वेट (जानवरों के डॉक्टर) अब भी हर वैक्सीन हर साल लगाते थे (WSAVA एशियन गाइडलाइंस, 2015)। यह गाइड WSAVA की 2024 की वैक्सीनेशन गाइडलाइंस और भारत में बिकने वाली वैक्सीन के लेबल पर आधारित है। आपके पपी का फाइनल शेड्यूल आपके वेट ही तय करेंगे।
कौन-सी वैक्सीन
कोर वैक्सीन: ये हर पपी को लगनी चाहिए।
- डिस्टेंपर, हेपेटाइटिस (एडेनोवायरस) और पार्वोवायरस। भारत में ये एक ही कॉम्बिनेशन वैक्सीन में आती हैं, आम तौर पर पैराइन्फ्लुएंजा के साथ: DHPPi। पार्वो और डिस्टेंपर से यहां आज भी पपी की जान जाती है।
- रेबीज। WSAVA रेबीज को हर उस जगह कोर वैक्सीन मानता है जहां यह बीमारी मौजूद है, और भारत भी ऐसी ही जगह है, “भले ही कानूनन यह जरूरी न हो” (WSAVA 2024)। लक्षण शुरू होने के बाद रेबीज से कुत्ते और इंसान, दोनों की जान चली जाती है।
- लेप्टोस्पायरोसिस (“लेप्टो”), बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी, जो पानी और चूहों के पेशाब से फैलती है और इंसानों को भी हो सकती है। जहां यह आम है और इसकी वैक्सीन मिलती है, वहां WSAVA इसे कोर मानता है, जैसे भारत में। इसे अक्सर कॉम्बिनेशन वैक्सीन में जोड़ दिया जाता है: DHPPi+L।
ऑप्शनल, कुत्ते की लाइफस्टाइल के हिसाब से:
- केनेल कफ (बोर्डेटेला और पैराइन्फ्लुएंजा): अगर आपका कुत्ता बोर्डिंग में रुकेगा, डेकेयर या ग्रूमिंग के लिए जाएगा, या किसी क्लास में जाएगा, तो यह लगवाना समझदारी है। बोर्डिंग वाले अक्सर यह वैक्सीन मांगते हैं।
लगवाने की सलाह नहीं: WSAVA के मुताबिक कोरोनावायरस और जिआर्डिया की वैक्सीन “पालतू कुत्तों के लिए रिकमेंड नहीं की जातीं” (WSAVA वैक्सीनेशन टेबल)। भारत में बिकने वाली कुछ कॉम्बिनेशन वैक्सीन में अब भी कोरोनावायरस होता है, इसलिए लेबल जरूर देखें।
“7-in-1” और “9-in-1” का मतलब
ये बाजार में चलने वाले नाम हैं, कोई स्टैंडर्ड नाम नहीं। ये नंबर बताते हैं कि एक कॉम्बिनेशन वैक्सीन में कितनी बीमारियां या स्ट्रेन शामिल हैं: “7-in-1” में आम तौर पर कोर वैक्सीन (DHPPi) और लेप्टोस्पायरोसिस के दो स्ट्रेन होते हैं, और “9-in-1” में वही, पर लेप्टो के चार स्ट्रेन (VOSD)। ब्रांड के हिसाब से ये नंबर बदलते हैं, इसलिए लेबल पढ़ें या वेट से पूछें कि इसमें क्या-क्या है।
वैक्सीनेशन शेड्यूल
| उम्र | वैक्सीन |
|---|---|
| 6 से 8 हफ्ते | पहली DHPPi। कई ब्रीडर और शेल्टर यह डोज खुद लगवा देते हैं। |
| उसके बाद हर 2 से 4 हफ्ते में | DHPPi दोबारा। लेप्टो की वैक्सीन आम तौर पर 8 हफ्ते से शुरू होती है, अक्सर उसी इंजेक्शन में (DHPPi+L), और इसकी दो डोज 2 से 4 हफ्ते के अंतर पर लगती हैं। |
| 16 हफ्ते या उसके बाद | DHPPi की आखिरी पपी डोज। आखिरी डोज 16 हफ्ते या उससे ज्यादा उम्र में होनी चाहिए। |
| 3 महीने की उम्र से | पहली एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV), जैसा Nobivac Rabies के लेबल पर लिखा है। कई वेट 3 से 4 हफ्ते बाद दूसरी डोज देते हैं। |
| करीब 26 हफ्ते (6 महीने) | कोर वैक्सीन का बूस्टर, ताकि वे पपी भी कवर हो जाएं जिनमें मां से मिली एंटीबॉडी ने पहले की वैक्सीन का असर रोक दिया हो। |
| हर साल | रेबीज और लेप्टो। |
| एडल्ट कुत्ते | कोर वैक्सीन (DHPPi) 3 साल में एक बार से ज्यादा नहीं। |
पपी को इतनी सारी वैक्सीन क्यों? पपी को मां से एंटीबॉडी मिलती हैं, जो करीब 16 हफ्ते की उम्र तक कभी भी खत्म हो सकती हैं (कब, यह पहले से नहीं कहा जा सकता), और जब तक वे रहती हैं, वैक्सीन का असर भी रोकती हैं। 16 हफ्ते या उसके बाद तक डोज दोहराने से यह पक्का हो जाता है कि इनमें से कोई एक डोज असर करेगी (WSAVA 2024)।
रेबीज: WSAVA की 2015 की एशियन गाइडलाइंस सुझाव देती हैं कि जहां रेबीज का खतरा ज्यादा है, जैसे भारत में, वहां पहली डोज के करीब 4 हफ्ते बाद पपी को दूसरी डोज दी जाए, इसलिए कई वेट दो डोज देते हैं। बूस्टर के लिए, भारत में Nobivac Rabies का लेबल 3 साल के अंतर की इजाजत देता है, लेकिन जहां रेबीज आम है वहां हर साल बूस्टर की सलाह देता है (MSD India, Nobivac Rabies), इसीलिए ज्यादातर भारतीय वेट इसे हर साल लगाते हैं।
एडल्ट कुत्तों के कोर बूस्टर: WSAVA के मुताबिक कोर वैक्सीन, अगर अकेली दी जाएं, तो 3 साल में एक बार से ज्यादा देने की जरूरत नहीं है। भारत में ये अक्सर लेप्टो के साथ एक ही इंजेक्शन में आती हैं, और लेप्टो हर साल लगती है, इसलिए कई कुत्तों को ये भी हर साल लग जाती हैं। आप वेट से पूछ सकते हैं कि क्या लेप्टो की अलग वैक्सीन मिल सकती है; MSD भारत में Nobivac DHPPi और Nobivac Lepto अलग-अलग बेचती है।
खर्च कितना आता है
Voice of Stray Dogs पूरे भारत के लिए मोटे तौर पर 2024-25 के ये दाम बताता है, और कहता है कि बेंगलुरु जैसे मेट्रो शहरों में दाम अक्सर इस रेंज के ऊपरी हिस्से में होते हैं (VOSD):
- DHPPi+L: ₹800 से ₹1,500 प्रति डोज
- रेबीज: ₹300 से ₹700
- वेट की फीस: ₹300 से ₹1,000 प्रति विजिट
इन दामों पर पहले छह महीनों में DHPPi की चार या पांच डोज, रेबीज की दो डोज और वेट विजिट मिलाकर करीब ₹5,000 से ₹14,000 बनते हैं। कई क्लिनिक इससे कम में पपी पैकेज देते हैं: VOSD पूरी पपी सीरीज के लिए ₹3,500 से ₹8,000 बताता है। पहले साल के पूरे बजट के लिए देखें बेंगलुरु में कुत्ता पालने का खर्च (अंग्रेजी में)।
भारत में मिलने वाले वैक्सीन ब्रांड
अपने वेट से पूछें कि वे कौन-सा ब्रांड इस्तेमाल करते हैं। भारत में बिकने वाले ब्रांड में ये शामिल हैं:
- Nobivac (MSD Animal Health): DHPPi, Lepto, L4, Rabies, Kennel Cough
- Canigen (Virbac)
- Megavac और Raksharab (Indian Immunologicals, हैदराबाद)
पपी और पार्क: कब ले जाना सुरक्षित है?
इस सवाल पर डॉग पेरेंट्स में सबसे ज्यादा बहस होती है। यहां दो बातें एक साथ सच हैं:
- जल्दी सोशलाइज करना जरूरी है। अमेरिकन वेटरनरी सोसाइटी ऑफ एनिमल बिहेवियर के मुताबिक पपी को पूरी वैक्सीन लगने से पहले ही सोशलाइज करना, यानी लोगों, कुत्तों और माहौल से घुलना-मिलना सिखाना चाहिए, क्योंकि शुरुआती तीन महीने तय करते हैं कि कुत्ता आगे दुनिया के साथ कैसे तालमेल बिठाएगा। पपी क्लास 7 से 8 हफ्ते की उम्र में शुरू हो सकती है, पहली वैक्सीन और पहली डीवर्मिंग के कम से कम 7 दिन बाद (AVSAB)।
- खतरा पार्क में है। इसी बयान में कहा गया है कि डॉग पार्क और ऐसी जगहों पर जाने से “बचना चाहिए, जहां ऐसे बहुत से कुत्ते आते-जाते हैं जिनके वैक्सीनेशन या बीमारी का पता नहीं”, और WSAVA कहता है कि जब तक वैक्सीन की सीरीज पूरी न हो जाए (यानी 16 हफ्ते या उसके बाद), पपी को घर के बाहर की उन जगहों से दूर रखें जहां कीटाणु हो सकते हैं।
इसलिए, जब तक आपके वेट न कहें कि पपी की वैक्सीन सीरीज पूरी हो गई है:
- हां: पपी को गोद में उठाकर बाहर ले जाना, ताकि वह ट्रैफिक, लोग और आवाजें देखे-सुने; उन दोस्तों के घर जाना जिनके कुत्ते स्वस्थ हैं और उन कुत्तों को सारी वैक्सीन लग चुकी हैं; ऐसी पपी क्लास जिनका फर्श साफ किया जाता है।
- नहीं: पब्लिक पार्क, ऐसी सड़कें जहां मोहल्ले के कुत्ते जमा होते हैं, पेट स्टोर और दूसरी जगहें जहां अनजान कुत्ते आ चुके हों। पार्वोवायरस जमीन पर लंबे समय तक जिंदा रहता है और दिखता भी नहीं।
जब आपका पपी तैयार हो जाए, तो देखें बेंगलुरु के किन पार्कों में कुत्ते ले जा सकते हैं (अंग्रेजी में)। कब्बन पार्क और शहर की झीलों पर रेबीज वैक्सीनेशन का सबूत मांगा जाता है, इसलिए सर्टिफिकेट अपने फोन में रखें।
डीवर्मिंग (पेट के कीड़ों की दवा)
डीवर्मिंग वैक्सीनेशन से अलग है। गर्म (ट्रॉपिकल) देशों के लिए बनी पैरासाइट गाइडलाइंस (TroCCAP) की सलाह है (TroCCAP):
- पपी: 2 हफ्ते की उम्र से, 8 हफ्ते का होने तक हर 2 हफ्ते में (साथ में मां को भी), फिर हर महीने।
- एडल्ट कुत्ते: हर महीने, और कम से कम हर 3 महीने में स्टूल टेस्ट।
भारत में मिलने वाली डीवर्मिंग की दवाओं में Drontal Plus, Kiwof Plus और Milbemax शामिल हैं। आपके वेट वजन और उम्र देखकर दवा चुनेंगे।
वैक्सीन लगने के बाद
एक-दो दिन तक यह सामान्य है: थोड़ी सुस्ती, हल्का बुखार, जहां सुई लगी वहां दर्द, थोड़ा कम खाना।
वेट को फोन करें अगर दो दिन में पपी पहले जैसा न हो जाए, या इंजेक्शन की जगह पर बनी गांठ बढ़ने लगे (VOSD)।
इमरजेंसी, तुरंत क्लिनिक वापस ले जाएं: चेहरे या आंखों के आसपास सूजन, पित्ती (त्वचा पर चकत्ते उभरना), बार-बार उल्टी, सांस लेने में तकलीफ, या गिर पड़ना। गंभीर एलर्जिक रिएक्शन कम ही होते हैं और आम तौर पर वैक्सीन के कुछ ही देर बाद शुरू होते हैं, इसीलिए पपी की शुरुआती वैक्सीन के बाद थोड़ी देर क्लिनिक में ही रुकना अच्छा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पपी की तबीयत ठीक न हो तो क्या वैक्सीन टाल सकते हैं? हां। वेट को बताएं। वे आम तौर पर पपी के ठीक होने तक इंतजार करेंगे।
क्या बेंगलुरु में रेबीज वैक्सीन लगवाना कानूनन जरूरी है? हमें ऐसा कोई लागू कानून नहीं मिला जो पालतू कुत्तों के लिए इसे जरूरी बनाता हो। बेंगलुरु के पालतू कुत्तों की एक ड्राफ्ट पॉलिसी, जो सितंबर 2026 तक लागू (नोटिफाई) नहीं हुई थी, वैक्सीनेशन को जरूरी बनाएगी (Deccan Herald, 16 Sep 2026), और कब्बन पार्क और शहर की झीलों पर रेबीज सर्टिफिकेट पहले से मांगा जाता है। फिर भी वैक्सीन जरूर लगवाएं: रेबीज से जान चली जाती है और यह भारत में मौजूद है।
क्या छोटे साइज के पपी को कम डोज चाहिए? नहीं। छोटी ब्रीड हो या बड़ी, वैक्सीन की डोज एक जैसी होती है।
क्या टाइटर (एंटीबॉडी) टेस्ट करवाया जा सकता है? WSAVA 20 हफ्ते की उम्र से, आखिरी वैक्सीन के कम से कम 4 हफ्ते बाद, टाइटर टेस्ट का समर्थन करता है, ताकि पता चले कि पपी पर वैक्सीन का असर हुआ या नहीं। अपने वेट से पूछें कि आपके शहर में यह टेस्ट होता है या नहीं। विदेश ले जाने के लिए रेबीज एंटीबॉडी टेस्ट का सैंपल आम तौर पर भारत से बाहर की लैब में भेजना पड़ता है: अक्टूबर 2026 में EU की मंजूर लैब की लिस्ट में कोई भी भारतीय लैब नहीं थी (EU की लिस्ट)।
मैंने गली का एक पपी गोद लिया है, जिसकी वैक्सीनेशन हिस्ट्री नहीं पता। अब क्या करूं? शुरुआत वेट विजिट, डीवर्मिंग और टिक चेक से करें, फिर पपी की सामान्य वैक्सीन सीरीज। जिस एडल्ट स्ट्रीट डॉग की हिस्ट्री पता न हो, उसके लिए WSAVA कहता है कि बहुत संभव है कि कोर वैक्सीन की एक ही डोज काफी हो, साथ में रेबीज। देखें इंडी डॉग को गोद लेना।
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